आजमगढ़ शहर के प्रतिष्ठित स्कूल का यह हाल हैरान करने वाला
कुछ ही दूरी पर मौजूद अधिकारियों का भी नहीं है कोई खौफ
उत्तर प्रदेश, आजमगढ़ जिला मुख्यालय के चर्चित डीएवी इंटर कॉलेज में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। विद्यालय में बच्चों के लिए भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बनाए जाने और दोपहर 12:30 बजे तक भोजन की तैयारी अधूरी रहने का मामला सामने आया है। विद्यालय प्रशासन ने गैस सिलेंडर, चूल्हा और बर्तन के लिए बजट नहीं मिलने की बात कही है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कर शासनादेश के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार, डीएवी इंटर कॉलेज में प्राथमिक से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है। प्रधानाचार्य सुशील कुमार के मुताबिक, कक्षा आठ तक करीब 200 छात्र नामांकित हैं। परीक्षा के चलते अधिकांश बच्चे विद्यालय में उपस्थित थे। उन्होंने दावा किया कि सभी बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार कराया जाता है। हालांकि, दोपहर करीब 12:30 बजे विद्यालय पहुंचने पर भोजन बनाने की व्यवस्था की अलग तस्वीर सामने आई। प्रवेश द्वार के दाहिनी तरफ स्थित एक कमरे में तीन रसोइयां लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाने की तैयारी करती मिलीं। रसोइयों ने बताया कि विद्यालय में कभी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया। लकड़ी के धुएं से आंखों में जलन होती है, लेकिन मजबूरी में इसी व्यवस्था के तहत भोजन बनाना पड़ता है। रसोइयों के अनुसार, उस समय करीब 100 बच्चों के लिए भोजन बनाने की तैयारी की जा रही थी। मौके पर आग जल रही थी और कटे हुए आलू-टमाटर के साथ एक बर्तन में थोड़ा सा चावल रखा था। भोजन की मात्रा को लेकर सवाल उठने पर रसोइयों ने बताया कि अतिरिक्त सब्जी लेने के लिए कर्मचारी बाहर गया है और चावल भी और निकाला जाएगा। निर्धारित मीनू के अनुसार तहरी या मौसमी सब्जी बनाए जाने की बात कही गई, लेकिन मौके पर उपलब्ध सामग्री को देखकर भोजन की मात्रा और समय पर वितरण को लेकर सवाल खड़े हुए।
प्रधानाचार्य सुशील कुमार ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद दोपहर एक बजे बच्चों को भोजन कराया जाता है। उनके अनुसार, गैस सिलेंडर और चूल्हे की कीमत के लिए सरकार से बजट नहीं मिलता और विद्यालय को अब तक गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी नगर नवनीत चौबे ने कहा कि यदि विद्यालय में लकड़ी पर भोजन बनाया जा रहा है और दोपहर 12:30 बजे तक आवश्यक सामग्री भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हुई है, तो यह घोर अनियमितता है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ शासनादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि विद्यालय में हाल ही में दूसरे प्रवेश द्वार का निर्माण भी कराया गया है, जिसके साथ दुकान भी बनाई गई है। ऐसे में विद्यालय में अन्य निर्माण कार्यों के बीच बच्चों के भोजन की व्यवस्था के लिए गैस सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा चर्चा में है। जिला मुख्यालय पर स्थित इस विद्यालय से जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी सहित कई अधिकारियों के कार्यालय कुछ सौ मीटर की दूरी पर हैं। अब देखना यह है कि जांच में क्या सामने आता है और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।
