Saturday 7 May 2022

सुल्तानपुर जिले के छापर गाँव के प्रधान की दबंगई, दौडा दौडाकर पड़ोसी को पीटा, जिसमे आधा दर्जन से अधिक लोग घायल विडिओ हुआ वायरल राजेन्द्र प्रसाद निषाद ने कोतवाली चांदा में दिया लिखित तहरीर मामले में चांदा पुलिस ने प्रधान व सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।


 सुल्तानपुर जिले के छापर गाँव के  प्रधान की दबंगई, दौडा दौडाकर पड़ोसी को पीटा, जिसमे आधा दर्जन से अधिक लोग घायल विडिओ हुआ वायरल 


राजेन्द्र प्रसाद निषाद ने कोतवाली चांदा में दिया लिखित तहरीर 


मामले में चांदा पुलिस ने प्रधान व सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।



उत्तर प्रदेश सुलतानपुर जिले के छापर गोला गांव में प्रधान व उसके परिवार वालों ने पड़ोसी के परिजनों को जमकर मारा पीटा, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग बुरी तरह घायल हो गए। दबंगई व मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 



घायलों का सीएचसी प्रतापपुर कमैचा में इलाज चल रहा है। मामले में चांदा पुलिस ने प्रधान व सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।



चांदा थाना क्षेत्र के छापर गोला गांव निवासी राजेन्द्र प्रसाद निषाद ने कोतवाली चांदा में लिखित तहरीर देकर बताया कि शनिवार सुबह करीब पांच बजे उनके परिजन पंचायत भवन के बगल मे    भोजन बना रहे थे तभी अचानक छापर प्रधान रवि निषाद, संजय निषाद, मधुवन निषाद, राजाराम निषाद, करेंटू निषाद आदि लोग आकर मेरे घर में घुस कर मेरे परिवार वालों को लाठी-डंडे व धारदार हथियार से मारने पीटने लगे जिसमें कई लोग घायल हो गए। 



मारने पीटने से मेरी पत्नी मीरा देवी व गेना देवी, कुसुम, रंगीता, सोनम, नीरज, गणेश बुरी तरह घायल हो गए। मामले में पुलिस ने सभी घायलों को सीएचसी इलाज के लिए भेजा है। 



इस सम्बन्ध में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली चांदा राम विशाल सुमन ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए भेजा गया। मामले में गम्भीर धाराओं में प्रधान व उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आईएएस रितु माहेश्वरी को हिरासत में लेकर पेश करने का आदेश प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े अवमानना के एक मामले में नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आईएएस रितु महेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।


  आईएएस रितु माहेश्वरी को हिरासत में लेकर पेश करने का आदेश


प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े अवमानना के एक मामले में नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आईएएस रितु महेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।



 कोर्ट ने अगली सुनवाई पर सीईओ को पुलिस हिरासत में पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर के सीजेएम को वारंट भेजकर उसका तामिला कराने का निर्देश दिया है।



यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने मनोरमा कुच्छल की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या सीईओ की मर्जी से चलेगा न्यायालय। नोएडा की सीईओ को आदेश दिया गया था कि वह दस बजे कोर्ट में हाजिर होंगी। इसके बावजूद उन्होंने एक ऐसी फ्लाइट चुनी जो दिल्ली से साढ़े दस बजे उड़ान भरेगी। यह बेहद अशोभनीय है। क्या न्यायालय उनकी सुविधा के हिसाब से काम करेगा। 



एक संस्थान का मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्तर का अफसर यह चाहता है कि उसकी मर्जी के हिसाब से मुकदमे में सुनवाई की जाए।

कोर्ट ने गत 28 अप्रैल के आदेश में रितु महेश्वरी से चार मई की सुनवाई में हाजिर रहने को कहा था। उस दिन भी रितु महेश्वरी हाजिर नहीं हुई थीं। 



गत दिवस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो नोएडा के वकील ने कोर्ट को बताया कि रितु महेश्वरी हवाई जहाज से आ रही हैं। उनकी फ्लाइट साढ़े दस बजे दिल्ली से उड़ान भरेगी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उन्हें दस बजे न्यायालय में हाजिर हो जाना चाहिए था। यह नोएडा की सीईओ का अनुचित कामकाज और व्यवहार है। यह कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है। सीईओ ने जानबूझकर न्यायालय की अवमानना की है।



नोएडा ने अवैधानिक रूप से याची की जमीन पर कब्जा कर लिया। उसे मुआवजे के तौर पर एक पैसा नहीं दिया गया। याची एक के बाद एक लगातार कोर्ट के सामने अपना हक मांग रहा है। नोएडा की सीईओ के खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बावजूद वह हाजिर नहीं हुईं।



 उनकी ओर से कहा जाता है कि वह जब तक नहीं आ जाती हैं, तब तक मामले में सुनवाई न की जाए। कोर्ट मानती है कि नोएडा की सीईओ का यह व्यवहार जानबूझकर न्यायालय का असम्मान करना है। एक संस्थान का मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्तर का अफ़सर यह चाहता है कि उसकी मर्जी के हिसाब से मुकदमे में सुनवाई की जाए।



 कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा नोएडा विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1990 में याची की जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण के लिए उचित प्रक्रिया और कानून का पालन नहीं किया गया। प्राधिकरण ने तब भी याची की जमीन को अपने कब्जे में ले लिया था। उस पर निर्माण भी कर दिया गया है। यह पूरी तरह अवैधानिक है। याची को उसकी जमीन का उचित मुआवजा दिए बिना संपत्ति में बदलाव कर देना अवैधानिक है। 



नोएडा की सीईओ रितु महेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का यह पर्याप्त आधार है। मामले पर अगली सुनवाई 13 मई को होगी।



यह है मामला-नोएडा के सेक्टर-82 में अथॉरिटी ने 30 नवंबर 1989 और 16 जून 1990 को अर्जेंसी क्लॉज के तहत भूमि अधिग्रहण किया था। जिसे जमीन की मालकिन मनोरमा कुच्छल ने चुनौती दी थी। वर्ष 1990 में मनोरमा की याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2016 को फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने अर्जेंसी क्लॉज के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। मनोरमा कुच्छल को नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत सर्किल रेट से दोगुनी दरों पर मुआवजा देने का आदेश दिया था।



इसके अलावा प्रत्येक याचिका पर पांच-पांच लाख रुपये का खर्च आंकते हुए भरपाई करने का आदेश प्राधिकरण को दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ नोएडा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट में भी अथॉरिटी मुकदमा हार गई। इसके बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। इस पर मनोरमा कुच्छल ने नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ यह अवमानना याचिका की।

उत्तर प्रदेश के 355 सब इंस्पेक्टरों को मिला प्रमोशन, बनाए गए इंस्पेक्टर


 उत्तर प्रदेश के 355 सब इंस्पेक्टरों को मिला प्रमोशन, बनाए गए इंस्पेक्टर


लखनऊ डीजीपी मुख्यालय ने विभिन्न जिलों में कार्यरत 355 सब इंस्पेक्टरों को उनके वर्तमान नियुक्ति के स्थान पर ही कार्यभार ग्रहण की तिथि से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नत करने का आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया।



 डीआईजी स्थापना सर्वेश कुमार राना की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा अधिकृत विभागीय चयन समिति की संस्तुति एवं डीजीपी मुकुल गोयल के अनुमोदन के बाद यह पदोन्नति प्रदान की गई है।



पदोन्नति प्राप्त इंस्पेक्टरों से कार्यभार ग्रहण करके सूचित करने का निर्देश दिया गया है। डीजीपी मुख्यालय के स्तर से स्थानान्तरण के आदेश अलग से जारी किए जाएंगे। प्रोन्नति के पद पर कार्यभार ग्रहण करने से पहले सब इंस्पेक्टरों को अपने विरुद्ध निलंबन, अनुशानिक कार्यवाही या आपराधिक आरोप के आधार पर अभियोजन की कार्यवाही के बारे में स्व हस्ताक्षरित घोषणा पत्र देना होगा। 



कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दो वर्ष तक प्रोबेशन पर रहेंगे।

उत्तर प्रदेश 5 आईएएस और 7 पीसीएस अधिकारियों का हुआ तबादला शशांक और ईशान बने मुख्यमंत्री के विशेष सचिव आजमगढ़ के ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट गौरव कुमार बने गोंडा के मुख्य विकास अधिकारी


 उत्तर प्रदेश 5 आईएएस और 7 पीसीएस अधिकारियों का हुआ तबादला


शशांक और ईशान बने मुख्यमंत्री के विशेष सचिव


आजमगढ़ के ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट गौरव कुमार बने गोंडा के मुख्य विकास अधिकारी



उत्तर प्रदेश लखनऊ शासन ने शुक्रवार देर शाम 5 आईएएस और 7 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। 


आईएएस अधिकारियों में गोंडा के मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी और श्रावस्ती के मुख्य विकास अधिकारी ईशान प्रताप सिंह को मुख्यमंत्री का विशेष सचिव बनाया गया है।



आजमगढ़ के ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट गौरव कुमार को गोंडा का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। वहीं, बागपत के ज्वॉइंट मजिस्ट्रेट अनुभव सिंह को श्रावस्ती को मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनाती दी गई है। प्रतीक्षा में चल रहीं अन्नापूर्णा गर्ग को अपर प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, लखनऊ के पद पर तैनाती दी गई है।

आज़मगढ़ एसडीएम सदर को हाईकोर्ट ने किया तलब कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद तहसील प्रशासन में मचा हड़कंप


 आज़मगढ़ एसडीएम सदर को हाईकोर्ट ने किया तलब


कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद तहसील प्रशासन में मचा हड़कंप



उत्तर प्रदेश आजमगढ़ मुबारकपुर कस्बा स्थित पोखरी संख्या 953 व 1219 को पाटे जाने के मामले में हाईकोर्ट ने एसडीएम सदर को 27 मई को तलब किया है।


 हाईकोर्ट द्वारा तलब किए जाने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मुबारकपुर कस्बे में कई पोखरियां है, जिसमें कईयों पर अवैध कब्जा कर लोग निर्माण तक करा लिए है। सितंबर 2015 में तत्कालीन चेयरमैन द्वारा पोखरी संख्या 953 व 1219 को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। जिसे वर्तमान चेयरमैन ने मिट्टी डलवा कर पटवा दिया और इन पोखरियों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया।


 मामला तूल पकड़ा तो  तत्कालीन ईओ ने जेसीबी लगवा कर पाटी गई मिट्टी को खोदवाने की कवायद भी शुरू किया लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद काम ठप हो गया। जिस पर कस्बा निवासी आमिर फहीम ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल किया। जिस पर हाईकोर्ट ने लगभग एक माह पूर्व एसडीएम सदर को उक्त दोनों पोखरियों में पाटी गई मिट्टी को निकलवा कर उनका अस्तित्व बहाल करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही एक माह का समय कृत कार्रवाई से अवगत कराने को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दिया था।



 इसके बाद भी सदर तहसील प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं किया। जिस पर न्यायालय ने एसडीएम सदर को पुन: नोटिस जारी करते हुए 27 मई को कृत कार्रवाई के साक्ष्यों के साथ तलब किया है। हाईकोर्ट से तलब किए जाने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है।