Monday, 25 May 2026

आजमगढ़ जमीन विवाद में युवक की हत्या मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद एंटी करप्शन कोर्ट ने सुनाई सजा, प्रत्येक पर 38 हजार रुपये का अर्थदंड


 आजमगढ़ जमीन विवाद में युवक की हत्या मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद



एंटी करप्शन कोर्ट ने सुनाई सजा, प्रत्येक पर 38 हजार रुपये का अर्थदंड



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक को 38-38 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट नंबर-1 अजय कुमार शाही ने सोमवार को सुनाया।


 अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मोहम्मद जीशान निवासी कुकड़ीपुर थाना पवई की गांव के याहिया से पुरानी जमीनी रंजिश चल रही थी। इसी विवाद को लेकर 11 जून 2020 की शाम करीब छह बजे आरोपी याहिया, मोहम्मद पुत्र सुकुरुल्लाह और मोहम्मद होजैफा ने वादी के भाई कासिम अहमद तथा चाचा अनीस और लतीफ पर चापड़, लाठी-डंडा और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल कासिम अहमद की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर तीनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अभय दत्त गोंड और हरेंद्र सिंह ने अदालत में कुल आठ गवाह प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और प्रत्येक पर 38 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 माह बढ़ा पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होने के संकेत 26 मई को समाप्त हो रहा था ग्राम पंचायतों का कार्यकाल


 उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 माह बढ़ा


पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होने के संकेत


26 मई को समाप्त हो रहा था ग्राम पंचायतों का कार्यकाल


लखनऊ, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के चलते प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। पंचायती राज विभाग ने सोमवार देर शाम इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। प्रदेश की 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। सरकार के इस फैसले के बाद वर्तमान ग्राम प्रधान चुनाव होने तक अपने पद पर बने रहेंगे। ग्राम प्रधान संगठनों ने भी मांग की थी कि नए चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी दी जाए। 


बताया जा रहा है कि यह पहला अवसर होगा जब प्रदेश में प्रशासनिक समिति बनाए जाने की व्यवस्था लागू होगी। सूत्रों के अनुसार, अब पंचायत चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना है। प्रदेश में जनवरी-फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके चलते पंचायत चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल टलती नजर आ रही है। इधर, पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी कर दिया है।


 पंचायतीराज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से छह माह के लिए की गई है। यह आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े आंकड़ों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने 18 मई 2026 को आयोग गठन की अधिसूचना जारी की थी। आयोग के गठन के साथ ही पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

जौनपुर दूल्हा हत्याकांड का मुख्य आरोपी रवि यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया एक लाख का था इनाम, मुठभेड़ में लाइन बाजार थाना प्रभारी घायल


 जौनपुर दूल्हा हत्याकांड का मुख्य आरोपी रवि यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया 


एक लाख का था इनाम, मुठभेड़ में लाइन बाजार थाना प्रभारी घायल



उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चर्चित दूल्हा हत्याकांड में फरार चल रहा मुख्य आरोपी रवि यादव सोमवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। रवि यादव पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। मुठभेड़ के दौरान लाइन बाजार थाना प्रभारी केके सिंह के हाथ में गोली लग गई, जबकि दो अन्य पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से बाल-बाल बच गए। 


पुलिस के अनुसार खेतासराय थाना क्षेत्र के रानीमऊ मोड़ के पास पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम को रवि यादव के मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसके बाद इलाके की घेराबंदी की गई। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में रवि यादव गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।


 मुठभेड़ में लाइन बाजार थाना प्रभारी केके सिंह के बाएं हाथ में गोली लगी। वहीं खेतासराय थाना प्रभारी श्रीप्रकाश शुक्ला और एसओजी टीम के सदस्य प्रवीण यादव की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली लगी, जिससे उनकी जान बच गई। गौरतलब है कि 1 मई 2026 को 25 वर्षीय आजाद बिंद की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह बारात लेकर शादी के लिए जा रहा था। इस सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। इनमें प्रदीप बिंद, रवि यादव और भोले राजभर पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। घटना के बाद से पुलिस और एसटीएफ की कई टीमें लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थीं। दिल्ली, वाराणसी, प्रयागराज, सुल्तानपुर समेत नेपाल तक छापेमारी की जा रही थी। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों प्रदीप बिंद और भोले राजभर की गिरफ्तारी के लिए अभियान लगातार जारी है।


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आजमगढ़ हाय रे रूपाली! न तो जमीन मिली न ही पैसा अवैध प्लाटिंग के जाल में फंस रही जनता, टूट रहे घर बनाने के सपने रूपाली डेवलपर काली चौरा पर पहुंचे सैकड़ो पीड़ित, थमा दिया तथाकथित इकरारनामा


 आजमगढ़ हाय रे रूपाली! न तो जमीन मिली न ही पैसा


अवैध प्लाटिंग के जाल में फंस रही जनता, टूट रहे घर बनाने के सपने


रूपाली डेवलपर काली चौरा पर पहुंचे सैकड़ो पीड़ित, थमा दिया तथाकथित इकरारनामा


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। कृषि योग्य और विवादित जमीनों को नियमों के विपरीत आवासीय प्लाट बताकर बेचने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इस अवैध कारोबार में आम लोगों की गाढ़ी कमाई फंस रही है और वर्षों बाद भी उन्हें न तो जमीन पर कब्जा मिल पा रहा है और न ही कोई ठोस समाधान। सबसे गंभीर बात यह है कि ऐसे मामलों में न प्रशासन की सख्ती दिखाई देती है और न ही शासन का प्रभावी हस्तक्षेप। रविवार को शहर के रैदोपुर काली चौरा क्षेत्र में उस समय लोगों की भीड़ जुट गई जब रूपाली डेवलपर नाम से कारोबार करने वाली फर्म के कार्यालय के सामने बड़ी संख्या में प्लाट खरीदार पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार नरौली के दक्षिण स्थित रामपुर राजस्व गांव में वर्षों पहले रूपाली डेवलपर द्वारा बड़े पैमाने पर प्लाटिंग कर जमीनें बेची गई थीं, लेकिन आज तक कई खरीदारों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। 


बताया जा रहा है कि मामले को शांत कराने के लिए रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता पुत्र पीपी गुप्ता निवासी कुर्मी टोला, आजमगढ़ द्वारा करीब 30 से 35 लोगों को 20 रुपये के स्टांप पर इकरारनामा बनाकर चेक सौंपे गए। इकरारनामे में उल्लेख किया गया है कि यदि 1 सितंबर 2026 तक खरीदारों को जमीन पर कब्जा मिल जाता है तो संबंधित चेक वापस कर दिया जाएगा। हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि तय समय तक कब्जा नहीं मिला तो खरीदार उस चेक का क्या करेंगे और उन्हें क्या राहत मिलेगी। यही नहीं, इकरारनामे की भाषा और प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जमीन पहले से विवादित थी तो उसकी प्लाटिंग और बिक्री कैसे की गई। आखिर बिना स्पष्ट स्वामित्व और विवाद निपटारे के आम लोगों को प्लाट बेचने की अनुमति किस आधार पर दी गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में कई जगह कृषि भूमि, बाढ़ क्षेत्र और विवादित जमीनों को आवासीय प्लाट बताकर बेचा जा रहा है। न तो मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था। ऐसे में लोग अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर भी असुरक्षित और विवादित जमीनों के मालिक बन रहे हैं। इस पूरे मामले पर रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता ने कहा कि वर्षों पहले प्लाटिंग कर जमीनें बेची गई थीं, लेकिन कुछ हिस्सेदारों द्वारा विवाद खड़ा कर दिए जाने के कारण कब्जा नहीं मिल पाया। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों के भरोसे के लिए ही इकरारनामा और चेक दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी फर्म कानपुर में पंजीकृत है और पूरे उत्तर प्रदेश में कारोबार के लिए मान्य है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवैध प्लाटिंग और विवादित जमीनों के इस कारोबार पर आखिर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा और क्या वर्षों से परेशान खरीदारों को कभी वास्तविक राहत मिल पाएगी।