आजमगढ़ हाय रे रूपाली! न तो जमीन मिली न ही पैसा
अवैध प्लाटिंग के जाल में फंस रही जनता, टूट रहे घर बनाने के सपने
रूपाली डेवलपर काली चौरा पर पहुंचे सैकड़ो पीड़ित, थमा दिया तथाकथित इकरारनामा
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। कृषि योग्य और विवादित जमीनों को नियमों के विपरीत आवासीय प्लाट बताकर बेचने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इस अवैध कारोबार में आम लोगों की गाढ़ी कमाई फंस रही है और वर्षों बाद भी उन्हें न तो जमीन पर कब्जा मिल पा रहा है और न ही कोई ठोस समाधान। सबसे गंभीर बात यह है कि ऐसे मामलों में न प्रशासन की सख्ती दिखाई देती है और न ही शासन का प्रभावी हस्तक्षेप। रविवार को शहर के रैदोपुर काली चौरा क्षेत्र में उस समय लोगों की भीड़ जुट गई जब रूपाली डेवलपर नाम से कारोबार करने वाली फर्म के कार्यालय के सामने बड़ी संख्या में प्लाट खरीदार पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार नरौली के दक्षिण स्थित रामपुर राजस्व गांव में वर्षों पहले रूपाली डेवलपर द्वारा बड़े पैमाने पर प्लाटिंग कर जमीनें बेची गई थीं, लेकिन आज तक कई खरीदारों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि मामले को शांत कराने के लिए रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता पुत्र पीपी गुप्ता निवासी कुर्मी टोला, आजमगढ़ द्वारा करीब 30 से 35 लोगों को 20 रुपये के स्टांप पर इकरारनामा बनाकर चेक सौंपे गए। इकरारनामे में उल्लेख किया गया है कि यदि 1 सितंबर 2026 तक खरीदारों को जमीन पर कब्जा मिल जाता है तो संबंधित चेक वापस कर दिया जाएगा। हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि तय समय तक कब्जा नहीं मिला तो खरीदार उस चेक का क्या करेंगे और उन्हें क्या राहत मिलेगी। यही नहीं, इकरारनामे की भाषा और प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जमीन पहले से विवादित थी तो उसकी प्लाटिंग और बिक्री कैसे की गई। आखिर बिना स्पष्ट स्वामित्व और विवाद निपटारे के आम लोगों को प्लाट बेचने की अनुमति किस आधार पर दी गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में कई जगह कृषि भूमि, बाढ़ क्षेत्र और विवादित जमीनों को आवासीय प्लाट बताकर बेचा जा रहा है। न तो मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था। ऐसे में लोग अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर भी असुरक्षित और विवादित जमीनों के मालिक बन रहे हैं। इस पूरे मामले पर रूपाली डेवलपर से जुड़े रत्नाकर गुप्ता ने कहा कि वर्षों पहले प्लाटिंग कर जमीनें बेची गई थीं, लेकिन कुछ हिस्सेदारों द्वारा विवाद खड़ा कर दिए जाने के कारण कब्जा नहीं मिल पाया। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि ग्राहकों के भरोसे के लिए ही इकरारनामा और चेक दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनकी फर्म कानपुर में पंजीकृत है और पूरे उत्तर प्रदेश में कारोबार के लिए मान्य है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवैध प्लाटिंग और विवादित जमीनों के इस कारोबार पर आखिर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा और क्या वर्षों से परेशान खरीदारों को कभी वास्तविक राहत मिल पाएगी।
