Thursday, 8 January 2026

आजमगढ़ भाजपा जिला उपाध्यक्ष ने दी आत्मदाह की धमकी, मचा हाहाकार छावनी में तब्दील हुआ कलेक्ट्रेट चौराहा, भूमि विवाद में पुलिस पर अवैध कब्जा कराने का आरोप


 आजमगढ़ भाजपा जिला उपाध्यक्ष ने दी आत्मदाह की धमकी, मचा हाहाकार



छावनी में तब्दील हुआ कलेक्ट्रेट चौराहा, भूमि विवाद में पुलिस पर अवैध कब्जा कराने का आरोप


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हरिवंश मिश्रा द्वारा आत्मदाह की धमकी की सूचना मिलने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर शहर कोतवाल सहित भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी। पूरा कलेक्ट्रेट छावनी में तब्दील हो गया। शहर कोतवाल भाजपा जिला उपाध्यक्ष हरिवंश मिश्रा को मनाने में लगे रहे। इस बावत हरिवंश मिश्रा ने बताया कि रानी की सराय थाना क्षेत्र के ग्राम-क्यामपुर में स्थित एक भूमि का मामला है। जिलाधिकारी के आदेश पर तहसील प्रशासन द्वारा नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल एवं पुलिस बल की मौजूदगी में पैमाइश की गई थी, जिसमें संबंधित भूमि चिन्हित की गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि उक्त भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कराया जा रहा है।

 पीड़ित हरिबंश मिश्रा ने आरोप लगाया है कि रानी की सराय थाना प्रभारी विपक्षी के प्रभाव में आकर कार्रवाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार उनके भाई ईश्वर शरण मिश्रा को थाने ले जाकर अपमानित किया गया। 8 जनवरी 2026 को सुबह करीब 11 बजे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर जमीन पर कब्जा कराने का प्रयास किया गया। जब पीड़ित ने लेखपाल व कानूनगो की रिपोर्ट का हवाला दिया तो थाना प्रभारी द्वारा उसे मानने से इनकार कर दिया गया। 


पीड़ित का कहना है कि उप जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में आश्वासन दिया गया था कि मौके पर कोई कब्जा नहीं करेगा, इसके बावजूद कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन विपक्षी के पक्ष में खड़ा है और उनके भाई को थाने में बैठा लिया गया है। हरिबंश मिश्रा ने कहा कि लगातार सुनवाई न होने और उत्पीड़न से वे मानसिक रूप से अत्यंत आहत हैं और आत्मदाह के लिए विवश हैं। फिलहाल कलेक्ट्रेट चौराहे पर गहमा गहमी की स्थिति बनी हुई है। पुलिस प्रशासन द्वारा भाजपा जिला उपाध्यक्ष हरिवंश मिश्र को मनाने की कोशिश जारी थी।

आजमगढ़ नकल के मामलों पर सख्ती, परीक्षा वर्ष 2026 के लिए कई प्रधानाचार्य व शिक्षक डिबार 3 वर्ष की डिबार अवधि, 2026 की परीक्षा में परीक्षक नहीं बन सकेंगे दोषी अधिकारी


 आजमगढ़ नकल के मामलों पर सख्ती, परीक्षा वर्ष 2026 के लिए कई प्रधानाचार्य व शिक्षक डिबार


3 वर्ष की डिबार अवधि, 2026 की परीक्षा में परीक्षक नहीं बन सकेंगे दोषी अधिकारी



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से परीक्षा वर्ष 2026 के लिए परीक्षकों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस क्रम में परिषद ने विगत वर्षों में नकल के मामलों में दोषी पाए गए केंद्र व्यवस्थापकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की है। परीक्षा समिति के निर्णय के अनुसार ऐसे अधिकारियों को तीन वर्ष के लिए डिबार किया गया है, जिसके चलते वे वर्ष 2026 की परीक्षा में परीक्षक के रूप में नियुक्त नहीं किए जा सकेंगे। 


जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) वीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जनपद की दो संस्थाओं के केंद्र व्यवस्थापक/प्रधानाचार्यों को सूची से बाहर किया गया है, जिन्हें परीक्षा वर्ष 2023 में अनुचित साधन प्रयोग के मामलों में दोषी पाया गया था। इनमें श्री कृष्ण गीता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, लालगंज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रमोद कुमार सिंह तथा चिल्ड्रेन पब्लिक इंटर कॉलेज, देवगांव के प्रधानाचार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त श्री गिरिधारी तिलकधारी इंटर कॉलेज, बिलरियागंज के प्रधानाचार्य श्रीकांत को आजीवन डिबार किया गया है। वहीं चंद्रभानु इंटर कॉलेज, मुसरियापुर नैनीजोर की सहायक अध्यापक एवं कक्ष निरीक्षक रहीं सरिता वर्मा को भी डिबार कर दिया गया है।


 डीआईओएस ने स्पष्ट किया कि डिबार किए गए किसी भी शिक्षक या अधिकारी की परीक्षा ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने और नकल जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डिबार सूची का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

उत्तर प्रदेश ...तो टल सकता है यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव बाधा बन सकता है यह कारण, पंचायतीराज मंत्री का दावा


 उत्तर प्रदेश ...तो टल सकता है यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव



बाधा बन सकता है यह कारण, पंचायतीराज मंत्री का दावा


लखनऊ, उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे, इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह अब तक राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है। आयोग के अभाव में पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण की प्रक्रिया तय नहीं हो पा रही है। पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर दावा किया है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय अप्रैल-मई में ही कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पंचायतीराज विभाग की ओर से छह सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, हालांकि अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


 जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 20.6982 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की आबादी 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इसी अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएंगी। वहीं ओबीसी वर्ग का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। रैपिड सर्वे 2015 के अनुसार प्रदेश की ग्रामीण आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत बताई गई थी, जिसके आधार पर वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय किया गया था। नियमों के अनुसार किसी भी ब्लॉक में ओबीसी की जनसंख्या 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी ग्राम प्रधान के पद 27 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षित नहीं किए जा सकते। यदि किसी क्षेत्र में यह प्रतिशत 27 से कम है, तो उसी अनुपात में आरक्षण लागू होगा।


 प्रदेश स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य है। नगर निकाय चुनावों के दौरान ओबीसी आबादी के आंकड़ों को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार ने नगर निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर रिपोर्ट तैयार करवाई थी। पंचायत चुनाव में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके तहत राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी आबादी का सर्वे करेगा और रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद ही आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। पंचायतीराज मंत्री ने कहा कि आयोग गठन में हो रही देरी को लेकर वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। उनका दावा है कि आयोग के गठन के दो माह के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, जिससे चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।