Sunday, 1 February 2026

आजमगढ़ सऊदी अरब में फंसे 161 भारतीय श्रमिक, 3 माह से वेतन और खुराकी बंद कंपनी की लापरवाही से भुखमरी के कगार पर मजदूर, सोशल मीडिया पर लगाई वतन वापसी की गुहार

आजमगढ़ सऊदी अरब में फंसे 161 भारतीय श्रमिक, 3 माह से वेतन और खुराकी बंद



कंपनी की लापरवाही से भुखमरी के कगार पर मजदूर, सोशल मीडिया पर लगाई वतन वापसी की गुहार


उत्तर प्रदेश, आजमगढ़, सऊदी अरब के अबहा शहर में काम कर रहे भारत के 161 श्रमिक बीते तीन माह से गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। संबंधित कंपनी द्वारा न तो उन्हें वेतन दिया जा रहा है और न ही खुराकी के लिए एक भी रियाल। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि बेहतर भविष्य के सपने लेकर विदेश गए ये श्रमिक अब घर से पैसे मंगाकर किसी तरह पेट पालने को मजबूर हैं। दाने-दाने को मोहताज इन श्रमिकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर भारत सरकार से सकुशल वतन वापसी की गुहार लगाई है। इस संकट में आजमगढ़ जिले के चार युवक भी शामिल हैं। 


महाराजगंज थाना क्षेत्र के कुढ़ई गांव निवासी जयसिंह साहनी दिसंबर 2024 में सऊदी अरब गए थे। उन्हें अलीसार कंस्ट्रक्शन कंपनी में पेंटिंग का काम मिला था। अनुबंध के अनुसार छह माह तक उन्हें प्रतिमाह 1300 रियाल बेसिक मजदूरी और 300 रियाल खुराकी मिलती रही। लेकिन जैसे ही छह माह पूरे हुए, कंपनी ने 161 भारतीय श्रमिकों का वेतन रोक दिया। मजदूरी को लेकर बार-बार संपर्क करने पर कंपनी द्वारा टालमटोल किया गया। अब तीन माह से श्रमिकों को एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। जयसिंह साहनी ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर सऊदी अरब के लेबर कोर्ट और पुलिस थाने के चक्कर लगाए, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इधर, कुढ़ई गांव में उनकी पत्नी नीलम तीन छोटे बच्चों के साथ पति की सलामती की दुआ कर रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। नीलम ने बताया कि पति से मोबाइल पर बात हो जाती है, लेकिन उनके खाने-पीने के लिए यहां से पैसे भेजने पड़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से जल्द पति की सुरक्षित वापसी कराने की मांग की है। 


इसी तरह रौनापार थाना क्षेत्र के गोड़ियाना अराजी देवारा नैनीजोर गांव निवासी योगेंद्र साहनी भी रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे, लेकिन चार माह बाद ही कंपनी में काम बंद हो जाने से वह कई महीनों से बेरोजगार हैं। घर पर उनके पिता रामवचन साहनी, माता किसवा देवी और अन्य परिजन रहते हैं। मां किसवा देवी ने बताया कि योगेंद्र तेरह माह से सऊदी में है, लेकिन केवल चार माह ही काम मिला। हाल ही में खाने-पीने के खर्च के लिए परिवार ने 5000 रुपये भेजे हैं। 


सुरहन मार्टीनगंज निवासी घनश्याम राजभर वर्ष 2023 में सऊदी अरब गए थे। उनकी पत्नी सविता ने बताया कि दो वर्षों से पति विदेश में फंसे हैं और घर पर दो बच्चियों की जिम्मेदारी उन पर है। 


वहीं बनगांव मार्टीनगंज निवासी सोनू बीते छह वर्षों से सऊदी अरब में रह रहे हैं। उनके परिवार में पत्नी सरिता देवी, मां दुर्गावती और तीन बच्चियां हैं। परिजनों ने बताया कि हाल ही में सोनू से बातचीत हुई है, लेकिन हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। विदेश में फंसे श्रमिकों और उनके परिजनों ने भारत सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर सभी श्रमिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी और बकाया वेतन दिलाने की मांग की है।

 

वाराणसी गेस्ट हाउस की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़ एसओजी और पुलिस की संयुक्त छापेमारी, 3 युवतियां, ग्राहक व मैनेजर गिरफ्तार चौकी से महज 400 मीटर की दूरी पर देह व्यापार, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल


 वाराणसी गेस्ट हाउस की आड़ में देह व्यापार का भंडाफोड़


एसओजी और पुलिस की संयुक्त छापेमारी, 3 युवतियां, ग्राहक व मैनेजर गिरफ्तार


चौकी से महज 400 मीटर की दूरी पर देह व्यापार, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल



उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एसओजी और भेलूपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में देह व्यापार के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। त्रिदेव मंदिर के ठीक सामने स्थित विजय लक्ष्मी पेइंग गेस्ट हाउस में तस्दीक के बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर एक कमरे से तीन युवतियों और एक ग्राहक को पकड़ा। इसके साथ ही गेस्ट हाउस के मैनेजर को भी हिरासत में लिया गया है। सभी को भेलूपुर थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। एसीपी अपूर्व पांडेय ने बताया कि पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के हेल्पलाइन नंबर पर अज्ञात कॉलर द्वारा गेस्ट हाउस में अनैतिक देह व्यापार की सूचना दी गई थी।


 सूचना के आधार पर सादी वर्दी में एसओजी-2 की टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान छह मोबाइल फोन, आपत्तिजनक सामग्री और 30 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस जांच में सामने आया है कि पकड़ी गई तीनों युवतियां पश्चिम बंगाल के कोलकाता की रहने वाली हैं, जिन्हें पांच दिन पहले बनारस लाया गया था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि ग्राहकों से मोबाइल फोन के जरिए संपर्क किया जाता था। व्हाट्सएप कॉल और मैसेजिंग के माध्यम से सौदे तय किए जाते थे, ताकि किसी प्रकार का रिकॉर्ड न रहे। इसके बाद ग्राहकों को सीधे गेस्ट हाउस भेजा जाता था। जांच में यह भी पाया गया कि विजय लक्ष्मी पेइंग गेस्ट हाउस में न तो कोई नियमित रजिस्टर रखा जाता था और न ही ठहरने वालों का सत्यापन कराया जाता था। इससे स्पष्ट है कि गेस्ट हाउस संचालक की जानकारी में ही यह अवैध गतिविधि लंबे समय से चल रही थी। 


दुर्गाकुंड चौकी से महज लगभग 400 मीटर की दूरी पर इस तरह का देह व्यापार का रैकेट संचालित होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गेस्ट हाउस में लंबे समय से संदिग्ध लोगों की आवाजाही देखी जा रही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।