Tuesday, 27 January 2026

आजमगढ़ मुबारकपुर 30 लाख रुपये की ठगी करने वाला वांछित अभियुक्त गिरफ्तार जमीन और प्लॉटिंग में निवेश का झांसा देकर हड़पे थे 30 लाख रुपये नोटिस फाड़ने पर पुलिस ने लिया हिरासत में, हिस्ट्रीशीटर है अभियुक्त

आजमगढ़ मुबारकपुर 30 लाख रुपये की ठगी करने वाला वांछित अभियुक्त गिरफ्तार



जमीन और प्लॉटिंग में निवेश का झांसा देकर हड़पे थे 30 लाख रुपये


नोटिस फाड़ने पर पुलिस ने लिया हिरासत में, हिस्ट्रीशीटर है अभियुक्त



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के थाना मुबारकपुर पुलिस ने 30 लाख रुपये की ठगी के मामले में वांछित अभियुक्त अमित यादव को गिरफ्तार किया है। मामले में वादिनी श्रीमती रुकमीना सरोज पत्नी रामबिलास सरोज, निवासी ग्राम गंजोर थाना मेहनगर द्वारा 26 जनवरी 2026 को तहरीर दी गई थी। तहरीर में बताया गया कि अभियुक्तों ने गांव में भूमि दिलाने और लखनऊ स्थित प्लॉटिंग में निवेश कराने का झांसा देकर दिनांक 21 सितंबर 2024 को आरटीजीएस के माध्यम से 10 लाख रुपये तथा 30 सितंबर 2024 को 20 लाख रुपये नकद प्राप्त किए थे। एक वर्ष बाद 45 लाख रुपये लौटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समय पूरा होने पर पैसा मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। उक्त मामले में थाना मेहनगर पर मु0अ0सं0 35/26 धारा 316(2), 352, 351(3) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।


 विवेचना के दौरान 27 जनवरी 2026 को थाना मुबारकपुर पुलिस द्वारा ग्राम मोहब्बतपुर स्थित शिव मंदिर के पास वांछित अभियुक्त अमित यादव को नोटिस तामील कराने का प्रयास किया गया, जिसे उसने लेने से इंकार करते हुए फाड़ दिया। अभियुक्त विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा था तथा वादिनी को लगातार जान से मारने की धमकी दे रहा था। परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने उसे दोपहर करीब 12:30 बजे हिरासत में ले लिया। अभियुक्त अमित यादव थाना मुबारकपुर का हिस्ट्रीशीटर है और उसके विरुद्ध हत्या के प्रयास व गैंगेस्टर एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक सतीश कुमार, हेड कांस्टेबल रतनलाल और कांस्टेबल दुर्गेश गोड़ शामिल रहे।

 

बरेली, सरकार ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को किया निलंबित इस्तीफे और बयानों से प्रशासनिक हलकों में मचा भूचाल यूजीसी और माघ मेले की घटना के विरोध में दिया था इस्तीफा, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप


 बरेली, सरकार ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को किया निलंबित



इस्तीफे और बयानों से प्रशासनिक हलकों में मचा भूचाल


यूजीसी और माघ मेले की घटना के विरोध में दिया था इस्तीफा, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप



उत्तर प्रदेश, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया है। उन्हें शामली स्थित कलेक्टर कार्यालय से अटैच किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच मंडलायुक्त, बरेली को सौंपी गई है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इससे पहले सोमवार को, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उनका यह इस्तीफा प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट की घटना के विरोध में बताया गया। अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पृष्ठों के इस्तीफे में तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि अब केंद्र और राज्य में न जनतंत्र बचा है और न ही गणतंत्र, बल्कि “भ्रमतंत्र” रह गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में अब देशी नहीं, बल्कि “विदेशी जनता पार्टी” की सरकार चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून का भी खुलकर विरोध किया। अपने पत्र में उन्होंने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा, वर्ष 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने का उल्लेख किया है। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बटुकों और ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। 


आरोप है कि एक बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जिससे उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा का हनन हुआ। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वह स्वयं ब्राह्मण वर्ग से हैं और इस घटना ने उन्हें भीतर तक आहत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना ब्राह्मण विरोधी मानसिकता को दर्शाती है और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है। 


इसी बीच सोमवार को उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर पर लिखा था— “#UGC Rollback, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” सोमवार शाम को अलंकार अग्निहोत्री डीएम आवास पहुंचे, जहां वह करीब एक घंटे तक रहे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें डीएम आवास पर लगभग 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर अपनी स्थिति से अवगत कराया। उनका कहना है कि कॉल किए जाने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएम अविनाश सिंह एक लखनऊ स्थित अधिकारी से स्पीकर पर बात कर रहे थे, तभी उस अधिकारी ने उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। अलंकार अग्निहोत्री ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया और कहा कि उन्हें रातभर आवास में रोकने की योजना थी।इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी आवास खाली करने के लिए अपने समर्थकों को बुलाया है। उनके समर्थक वहां पहुंचने लगे हैं, जिससे स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।