Sunday, 4 October 2026

गोरखपुर थप्पड़ काण्ड के बाद एक्शन में आये सपा मुखिया अखिलेश यादव सपा की गोरखपुर जिला और महानगर इकाई में मचा हड़कंप, प्रेस वार्ता के दौरान हुआ था विवाद


 गोरखपुर थप्पड़ काण्ड के बाद एक्शन में आये सपा मुखिया अखिलेश यादव


सपा की गोरखपुर जिला और महानगर इकाई में मचा हड़कंप, प्रेस वार्ता के दौरान हुआ था विवाद



उत्तर प्रदेश गोरखपुर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर जिले और महानगर की पार्टी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी का यह फैसला एक दिन पहले आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दो नेताओं के बीच हुए विवाद और मारपीट की घटना के बाद सामने आया है। इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने और पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जारी निर्देश के अनुसार, गोरखपुर के जिला अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष सहित दोनों इकाइयों की पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है। इसके साथ ही फ्रंटल संगठनों तथा प्रदेश और राज्य स्तर की कार्यकारिणियों में गोरखपुर से जुड़े सभी पदाधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। इस फैसले से जिले और महानगर में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव की स्थिति बन गई है। दरअसल, विवाद की शुरूआत एक दिन पहले आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान हुई थी। गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहे अंशुमान सिंह और पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान अंशुमान सिंह के बेटे ने कथित तौर पर पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद प्रेस वार्ता में मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को शांत कराया। इस घटनाक्रम से पार्टी के स्थानीय संगठन की किरकिरी हुई।


 मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचाई गई। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। विवाद के दिन ही शाम तक अंशुमान सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके अगले दिन शनिवार को राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोरखपुर जिले और महानगर की सभी संबंधित इकाइयों को भंग करने का निर्णय लिया। इस कार्रवाई को केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम तक सीमित न मानकर संगठन के स्तर पर उठाई गई व्यापक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी की इस कार्रवाई के बाद अब गोरखपुर में नए संगठनात्मक गठन को लेकर चचार्एं तेज हो गई हैं। जिला और महानगर इकाइयों के भंग होने से नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन को दोबारा व्यवस्थित करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, नए अध्यक्षों और कार्यकारिणी के गठन को लेकर आगे की स्थिति पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगी। राजनीतिक दृष्टि से भी इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। आगामी चुनावों और संगठन की मजबूती के लिहाज से पार्टी नेतृत्व के सामने स्थानीय स्तर पर एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। प्रेस वार्ता में हुआ विवाद और उसके बाद की गई कार्रवाई ने गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक हालात को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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