आजमगढ़ फूलपुर, डीएपी की किल्लत से किसान परेशान, बाजार में 1800 रुपये तक पहुंची बोरी
सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता प्रभावित, किसानों को प्रति बोरी 450 रुपये तक अतिरिक्त खर्च, बंद गोदामों और जर्जर भवनों से भी बढ़ीं मुश्किलें
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले मे रबी की फसलों की बुवाई के बीच फूलपुर ब्लाक क्षेत्र में डीएपी खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। सरकारी साधन सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने के कारण किसानों को मजबूरन खुले बाजार से डीएपी खरीदनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि बाजार में डीएपी की एक बोरी 1800 रुपये तक में मिल रही है, जबकि सहकारी समितियों पर इसकी कीमत 1350 रुपये प्रति बोरी रही है। इस तरह किसानों को एक बोरी पर 450 रुपये तक अधिक खर्च करना पड़ रहा है।किसानों की सुविधा के लिए पूर्व में न्याय पंचायत स्तर पर साधन सहकारी समितियों के गोदाम स्थापित किए गए थे। इन समितियों से किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराया जाता था। पहले सदस्य किसानों को पासबुक के आधार पर उधार खाद-बीज भी मिलता था, जिसका भुगतान वे फसल बेचने के बाद करते थे। समितियों पर धान और गेहूं की खरीद की व्यवस्था भी थी। हालांकि, समय के साथ आर्थिक नुकसान और अन्य समस्याओं के चलते कई समितियों की व्यवस्था प्रभावित हो गई।
फूलपुर ब्लाक में कुल 12 न्याय पंचायतें हैं। किसानों के मुताबिक, वर्तमान में कुछ ही समितियों के माध्यम से उर्वरक वितरण हो पा रहा है। खरसहन, पल्थी, सजई, अमनाबाद, खानजहांपुर, लोनियाडीह और सदरपुर-बरौली सहित विभिन्न समितियों पर खाद की उपलब्धता को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं। सदरपुर-बरौली समिति के सचिव सुधीर सिंह के खिलाफ जांच चलने के कारण सुदनीपुर स्थित गोदाम से दूसरे सचिव को भेजकर खाद वितरण कराया जा रहा है। इसके अलावा, ब्लाक में एडीओ सहकारिता का पद भी रिक्त बताया जा रहा है। ऐसे में समितियों के संचालन और किसानों तक समय से उर्वरक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। खरसहन साधन सहकारी समिति के सचिव दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि उनकी समिति के गोदाम में डीएपी उपलब्ध थी, जिसे किसानों को 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से वितरित किया गया। उन्होंने कहा कि हड़ताल समाप्त होने के बाद दोबारा उर्वरक की आपूर्ति होने पर वितरण किया जाएगा। गोबरहा ग्राम पंचायत के किसान अखिलेश कुमार ने बताया कि उन्होंने सरसों, चना और मटर की बुवाई के लिए 1800 रुपये प्रति बोरी की दर से डीएपी खरीदी। उनका कहना है कि यदि सरकारी समिति पर समय से खाद उपलब्ध हो जाती, तो उन्हें कम कीमत पर उर्वरक मिल जाता और आर्थिक बोझ भी नहीं बढ़ता। चमावा निवासी महताब अहमद और बूढ़ापुर बदल निवासी चंद्रभान यादव ने बताया कि पूरा दुलार राजस्व गांव में स्थित साधन सहकारी समिति का गोदाम वर्षों से बंद पड़ा है। भवन भी जर्जर हो चुका है। पहले सुदनीपुर स्थित समिति से खाद मिल जाती थी, लेकिन इस बार समय से उपलब्धता नहीं होने के कारण बाजार से महंगे दाम पर डीएपी खरीदनी पड़ रही है।
सुदनीपुर निवासी राजबहादुर यादव और मोहम्मद अनवर ने बताया कि उन्होंने राजकीय कृषि बीज भंडार से गेहूं और चने का बीज खरीद लिया है, लेकिन डीएपी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, भेड़िया गांव के किसान लखिलाल ने बताया कि उनकी क्षेत्रीय साधन सहकारी समिति का भवन जर्जर है। पहले पल्थी समिति से खाद मिल जाती थी, लेकिन इस बार सरसों और मटर की बुवाई के लिए खुले बाजार से महंगी डीएपी खरीदनी पड़ी। किसानों का कहना है कि सहकारी समितियों पर खाद उचित दर पर मिलने के साथ उसकी गुणवत्ता को लेकर भी भरोसा रहता है। इसके विपरीत, खुले बाजार में महंगे दाम पर खाद खरीदने के बावजूद उसकी गुणवत्ता को लेकर आशंका बनी रहती है। रबी की बुवाई के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से किसानों का खर्च बढ़ रहा है और खेती का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसानों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि साधन सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध कराई जाए, लंबे समय से बंद गोदामों को फिर से चालू किया जाए और जर्जर भवनों की मरम्मत कराई जाए। साथ ही, उर्वरक वितरण व्यवस्था को दुरुस्त कर किसानों को समय से खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें खुले बाजार में महंगे दाम चुकाने के लिए मजबूर न होना पड़े।

No comments:
Post a Comment