आजमगढ़ सिधारी, कितने रुपए में हुआ था मासूम का सौदा ?
बच्चा बदले जाने की खबरों के बीच चर्चा में आया रेनबो हॉस्पिटल
आधी रात को वापस मिला दंपति को अपना बच्चा
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में नवजात को बदले जाने को लेकर उठे विवाद ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। रेनबो हॉस्पिटल में भर्ती बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनका बेटा बदलकर बच्ची दे दी गई। मामले ने तूल तब पकड़ा जब अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया और “मासूम के सौदे” की चर्चाएं होने लगीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर जांच शुरू की, जिसके बाद दंपति को उनका नवजात बच्चा वापस मिला। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि सिधारी थाना क्षेत्र में स्थित रेनबो हॉस्पिटल में नवजात को बदले जाने के बाद जमकर हंगामा किया गया। शहर कोतवाली के आसिफगंज निवासी कमलेश वर्मा के अनुसार उनकी ससुराल बलिया जिले में है, 12 मई को बलिया जिले के महिला अस्पताल में उनकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया था। नवजात की हालत बिगड़ने लगी, जिसके चलते 12 मई की शाम नवजात को आज़मगढ़ के रेनबो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। नवजात को अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में उपचार के लिए रखा गया था। परिजनों का आरोप है कि 27 मई दिन बुधवार को जब बच्चे को एनआईसीसीयू वार्ड से बाहर निकाला गया और उसकी मां को दिखाया गया, तब उन्हें पता चला कि बच्चा की जगह बच्ची है। इसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया, परिजन पैसों के लेनदेन के बाद बच्चों की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए हंगामे पर उतर आए। इस दौरान अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
बताया जा रहा है कि इसके बाद रेनबो अस्पताल के मैनेजर शशि पांडेय तथा बच्चे के पिता कमलेश वर्मा सहित तीन लोग बुधवार की रात को ही कंचनपुर, रासेपुर बोंगरिया गांव जाकर बच्चे को वापस लाये। इस बावत आजमगढ़ पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण भी दिया गया कि दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया, अब स्थिति सामान्य है। अब इसके बाद शुरू हुआ जो किसी बड़े शर्मनाक घटनाक्रम से कम नहीं है। जिस पिता द्वारा अपने बच्चे को बदले जाने को बात कही जा रही थी, अब उसके द्वारा दुबारा बयान दिया गया कि अस्पताल में ऐसी कोई घटना उसके साथ नहीं हुई। वहीं आजमगढ़ पुलिस द्वारा इस मामले में साफ शब्दों में बताया गया है कि दोनों परिजनों को उनके बच्चे सौंप दिए गए हैं। वहीं इस मामले में एक धड़ा खुलकर अस्पताल प्रशासन के समर्थन में आ गया और इतनी बड़ी घटना को अफवाह करार दे दिया। अगर घटना अफवाह है तो हंगामा हुआ क्यों ? अब सही कौन है, गुम हुए बच्चे के पिता का पहला बयान जिसमें बच्चे को बदले जाने की बात कही गई है, या फिर बच्चा मिलने के बाद दूसरे दिन दिया गया बयान कि बच्चा नहीं खोया था, या फिर आज़मगढ़ पुलिस द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण कि दोनों परिजनों को उनके बच्चे सौंप दिए गए हैं, या फिर वह एकतरफा बात करने वाला वह धड़ा जिसने पूरे घटनाक्रम को ही अफवाह करार दे दिया, यह एक बड़ा रहस्य है। (आपको बता दें कि इस घटनाक्रम में एक बड़ा सच एक दिन बाद कल की खबर में दिये जाने का प्रयास किया जाएगा, जो इस घटना के हर रहस्य से पर्दा हटा देगा)।

No comments:
Post a Comment