Friday, 7 August 2026

आजमगढ़, जिला अस्पताल के दवा कक्ष में बर्थडे पार्टी, घंटों लाइन में खड़े रहे मरीज दवा वितरण छोड़ केक काटने में व्यस्त रहे फार्मासिस्ट, वायरल वीडियो के बाद जांच के आदेश


 आजमगढ़, जिला अस्पताल के दवा कक्ष में बर्थडे पार्टी, घंटों लाइन में खड़े रहे मरीज



दवा वितरण छोड़ केक काटने में व्यस्त रहे फार्मासिस्ट, वायरल वीडियो के बाद जांच के आदेश


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला अस्पताल से मानवता और सरकारी सेवा की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करने वाला एक वीडियो सामने आया है। अस्पताल के मुख्य दवा वितरण कक्ष में मंगलवार दोपहर ड्यूटी के दौरान जन्मदिन की पार्टी मनाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि पार्टी के चलते सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों दवा के लिए लाइन में इंतजार करना पड़ा। हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि न्यूज़9यू0पी0 नहीं करता है।


 बताया जा रहा है कि दवा कक्ष प्रभारी अनिल चौधरी का मंगलवार को जन्मदिन था। सुबह से ही कुछ स्वास्थ्यकर्मी इसकी तैयारियों में जुटे थे। दोपहर करीब 12 बजे दवा वितरण काउंटर पर मरीजों की लंबी कतार लगी थी, लेकिन इसी दौरान दवा कक्ष के भीतर केक काटने, फोटो खिंचवाने और जन्मदिन का जश्न मनाने का कार्यक्रम शुरू हो गया। बाहर उमस और गर्मी में खड़े मरीज दवा मिलने का इंतजार करते रहे, जबकि अंदर मौजूद फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी समारोह में व्यस्त रहे। वीडियो में दवा कक्ष और संवेदनशील स्टॉक रूम को गुब्बारों व रिबन से सजाया गया दिखाई दे रहा है। दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्ग, महिलाएं और गोद में बीमार बच्चों को लिए परिजन लंबे समय तक काउंटर पर खड़े रहे।


 आरोप है कि इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने भी स्थिति पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. सतीश चंद्र कन्नौजिया ने कहा, "दवा कक्ष में इस तरह पार्टी मनाना गलत है। यदि ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

आजमगढ़, एंबुलेंस के इंतजार में बुझ गई मासूम की जिंदगी, पिता की गोद में तोड़ा दम परिजनों ने डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करने का लगाया आरोप


 आजमगढ़, एंबुलेंस के इंतजार में बुझ गई मासूम की जिंदगी, पिता की गोद में तोड़ा दम



परिजनों ने डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करने का लगाया आरोप



उत्तर प्रदेश आजमगढ़, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित लापरवाही ने एक 11 वर्षीय मासूम की जिंदगी छीन ली। मऊ जिले के रानीपुर फतेहपुर निवासी अंश की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर 108 एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप है। परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए वाराणसी ले जाने में हुई देरी के कारण रास्ते में ही पिता की गोद में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 


जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम अंश की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन उसे पहले चिरैयाकोट के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति देखते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज, चक्रपानपुर रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे को तत्काल वेंटिलेटर की आवश्यकता है, लेकिन वहां कोई वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद उसे बीएचयू, वाराणसी रेफर कर दिया गया। पीड़ित पिता अमित का आरोप है कि उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा पर कई बार फोन किया, लेकिन हर बार उन्हें केवल "10 मिनट में एंबुलेंस पहुंचने" का आश्वासन मिलता रहा। उनका कहना है कि करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंची, जबकि इस दौरान बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। सरकारी एंबुलेंस न मिलने पर परिजनों ने उधार और मदद से निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और बच्चे को वाराणसी के लिए रवाना किया। हालांकि बीएचयू पहुंचने से पहले ही रास्ते में अंश ने पिता की गोद में अंतिम सांस ले ली।


 मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. कृष्णकांत ने बताया कि बच्चे के फेफड़ों में पानी भर गया था और उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उन्होंने कहा कि बीएचयू से भी संपर्क किया गया था। वहीं, पिता अमित का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, 108 एंबुलेंस सेवा के प्रभारी अजय ने परिजनों के आरोपों से अलग दावा करते हुए कहा कि जिले में 108 एंबुलेंस का औसत रिस्पांस टाइम सात मिनट है। उनके अनुसार, बुधवार रात पहला कॉल 9:09 बजे प्राप्त हुआ था और रात 9:45 बजे एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मरीज को ले जाने के लिए तैयार थी। वहीं, 108 सेवा के रीजनल मैनेजर सुमित सिंह ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज से प्रतिदिन 15 से 16 मरीज रेफर होते हैं। मेडिकल कॉलेज में दो से तीन एंबुलेंस तैनात रहती हैं, लेकिन कई बार वे अन्य रेफर मरीजों को ले जाने में व्यस्त होती हैं। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस की उपलब्धता और गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Thursday, 6 August 2026

आजमगढ़ फूलपुर, प्राथमिक विद्यालय के पास लावारिस मिली नवजात बच्ची पुलिस ने सुरक्षित कराया उपचार, स्वस्थ होने पर बच्ची को महिला को किया गया सुपुर्द

आजमगढ़ फूलपुर, प्राथमिक विद्यालय के पास लावारिस मिली नवजात बच्ची


पुलिस ने सुरक्षित कराया उपचार, स्वस्थ होने पर बच्ची को महिला को किया गया सुपुर्द


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के फूलपुर तहसील क्षेत्र के खानपुर चितरावल गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास गुरुवार सुबह एक नवजात बच्ची लावारिस अवस्था में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों ने बच्ची को देखा और तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।


 प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक अज्ञात महिला नवजात बच्ची को विद्यालय के पास छोड़कर चली गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित फूलपुर स्थित निजी खुशी चाइल्ड केयर अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉ. एस.के. यादव की देखरेख में नवजात का प्राथमिक उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी लगातार निगरानी की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बच्ची को छोड़कर जाने वाली महिला की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। उपचार के बाद नवजात बच्ची को किरन देवी की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। बच्ची के घर पहुंचने पर किरन देवी के परिजनों ने खुशी जताई।


 कोतवाली प्रभारी निरीक्षक फूलपुर देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि चितरावल गांव में मिली नवजात बच्ची को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा गया था। बच्ची सुरक्षित है और मामले की जांच जारी है। नवजात के मिलने की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

आजमगढ़ कन्धरापुर 43 लाख की जमीन धोखाधड़ी में वांछित आरोपी गिरफ्तार बैनामा कराने के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप, विवेचना में बढ़ीं कई गंभीर धाराएं


 आजमगढ़ कन्धरापुर 43 लाख की जमीन धोखाधड़ी में वांछित आरोपी गिरफ्तार


बैनामा कराने के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप, विवेचना में बढ़ीं कई गंभीर धाराएं



उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के थाना कन्धरापुर पुलिस ने 43 लाख रुपये की कथित जमीन धोखाधड़ी के मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर भूमि का बैनामा कराने के नाम पर रुपये लेने, बैनामा न करने तथा रकम वापस मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित की तहरीर पर थाना कन्धरापुर में मुकदमा संख्या 84/2026 दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान बैंक खातों और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच में कम्हेनपुर निवासी दिवाकर (59) का नाम सामने आया। इसके बाद मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई अन्य गंभीर धाराएं भी बढ़ाई गईं। 


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में गुरुवार को वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी को उसके गांव कम्हेनपुर से गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल अजय कुमार त्रिपाठी और कांस्टेबल नितिन कुमार मिश्रा शामिल रहे।

आजमगढ़ सरायमीर दर्दनाक सड़क हादसा, महिला की मौत पति बाल बाल बचा मजलिस से लौटते समय पवई लाडपुर मंदिर के पास हुआ हादसा


 आजमगढ़ सरायमीर दर्दनाक सड़क हादसा, महिला की मौत पति बाल बाल बचा 



मजलिस से लौटते समय पवई लाडपुर मंदिर के पास हुआ हादसा


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले मे सरायमीर थाना क्षेत्र के पवई लाडपुर मंदिर के पास बुधवार शाम हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार महिला की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा मामले की जांच शुरू कर दी है। 


जानकारी के अनुसार, सरायमीर थाना क्षेत्र के पुरन्दरपुर रोजा मोहल्ला निवासी 48 वर्षीय अज्जन हुसैन अपनी 45 वर्षीय पत्नी किशवर बानो के साथ मेहनगर थाना क्षेत्र के शाह देवइत गांव में आयोजित एक मजलिस में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम से वापस लौटते समय पवई लाडपुर मंदिर के पास पीछे से आ रहे ट्रक की साइड उनकी बाइक से टकरा गई। टक्कर लगने से किशवर बानो सड़क पर गिर गईं और ट्रक के पहिए के नीचे आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति अज्जन हुसैन बाल-बाल बच गए। घटना की सूचना मिलते ही सरायमीर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर थाने भेज दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतका अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री छोड़ गई हैं। हादसे के बाद परिवार में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

बलिया बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर रसड़ा से लगातार तीन बार बने विधायक, जनसेवा और सामूहिक विवाह आयोजनों से बनाई थी अलग पहचान


 बलिया बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर


रसड़ा से लगातार तीन बार बने विधायक, जनसेवा और सामूहिक विवाह आयोजनों से बनाई थी अलग पहचान



उत्तर प्रदेश लखनऊ/बलिया, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता एवं बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश विधानसभा, बलिया जनपद और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। उमाशंकर सिंह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के इकलौते विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे और बाद में उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया गया था। 


उमाशंकर सिंह ने पहली बार वर्ष 2012 में सामान्य घोषित हुई रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 में भी लगातार जीत हासिल कर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ कायम रखी। एक समय दो लाभ के पद के मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई थी, लेकिन बाद में उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी। राजनीति के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी उमाशंकर सिंह की अलग पहचान थी। उन्होंने पहले 251 और बाद में 351 जरूरतमंद जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी। शिक्षा, सामाजिक सहायता और जनकल्याण के कार्यों के कारण उन्हें क्षेत्र में एक जनप्रिय नेता के रूप में जाना जाता था। उनके निधन पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह का निधन सामाजिक और राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।


 उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र के खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी थे। अपने सरल स्वभाव, संगठन के प्रति निष्ठा और जनसेवा के कारण उमाशंकर सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। उनके निधन से बसपा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जगत ने एक सक्रिय जननेता को खो दिया।

Wednesday, 5 August 2026

आजमगढ़ शहर कोतवाली, हत्या मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सीजेएम सख्त, शहर कोतवाल से मांगी आख्या कोर्ट के आदेश के 28 दिन बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं, 12 अगस्त तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश

आजमगढ़ शहर कोतवाली, हत्या मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सीजेएम सख्त, शहर कोतवाल से मांगी आख्या


कोर्ट के आदेश के 28 दिन बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं, 12 अगस्त तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले मे हत्या के एक मामले में न्यायालय के आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सत्यवीर सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने शहर कोतवाल से मामले में आख्या तलब करते हुए 12 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामला 16 अप्रैल 2026 का है। शहर कोतवाली क्षेत्र के गुरुटोला निवासी संजय कुमार पाठक के पुत्र सुधाकर पाठक का शव पुरानी जेल के सामने पावर हाउस के पीछे स्थित बंधे पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।



 परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए आरोप लगाया था कि शराब के ठेके के मालिक विनोद राय और उनके सहयोगियों ने घटना को अंजाम दिया है। परिजनों का आरोप है कि हत्या की आशंका जताने के बावजूद शहर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद मृतक के भाई पदमाकर पाठक ने अपने अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद सिंह के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद सीजेएम ने 7 जुलाई 2026 को शहर कोतवाली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि, आदेश पारित होने के 28 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस पर पीड़ित पक्ष ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यवीर सिंह ने शहर कोतवाल से 12 अगस्त 2026 तक विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।