आजमगढ़ जिला जेल में पड़ गया डाका!, रिहा कैदी ने 35 लाख पर किया हाथ साफ
18 महीने तक चला घोटाला, जेल प्रशासन रहा बेखबर, मुकदमा दर्ज
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिला कारागार से एक सनसनीखेज वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसमें रिहा कैदी रामजीत यादव उर्फ संजय ने जेल अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी खाते से 35 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। इस मामले ने जेल प्रशासन और बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह ने कोतवाली आजमगढ़ में रामजीत यादव सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, रामजीत यादव को जेल में रहते हुए कामकाज की जिम्मेदारी दी गई थी। इस दौरान उसने बैंक चेक और हस्ताक्षर की प्रक्रिया को समझ लिया। 20 मई 2024 को जमानत पर रिहा होने के बाद उसने जेल अकाउंटेंट के कमरे से केनरा बैंक की चेकबुक चुरा ली। इसके बाद 21 मई 2024 को 10 हजार रुपये, 22 मई को 50 हजार रुपये और फिर 1.40 लाख रुपये निकाले। 18 महीनों तक वह लगातार खाते से पैसे निकालता रहा, लेकिन जेल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। 22 सितंबर 2025 को 2.60 लाख रुपये की निकासी के बाद बैंक स्टेटमेंट की जांच में घोटाला उजागर हुआ। रामजीत ने अपनी पत्नी नीतू यादव के खाते में 2.40 लाख, मां सुदामी देवी के खाते में 3 लाख और अपने खाते में करीब 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
जेल अधीक्षक ने रामजीत यादव, पूर्व कैदी शिवशंकर उर्फ गोरख, वरिष्ठ सहायक मुशीर अहमद और चौकीदार अवधेश कुमार पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। रामजीत बिलरियागंज का रहने वाला है और 2011 में पत्नी की हत्या के मामले में जेल जा चुका है। 2017 में जमानत पर रिहा होने के बाद उसने नीतू से दूसरी शादी की थी, लेकिन 2023 में दोबारा सजा काटने जेल गया। लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में जेल प्रशासन की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
https://www.news9up.com/2025/10/5285-4.html
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