वाराणसी मीडिया को देख चिल्लाईं युवतियां, कहा हमें फंसा रही है पुलिस
छापे के दौरान गिरफ्तार 21 युवतियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश, वाराणसी महमूरगंज स्थित शाही टॉवर में संचालित फर्जी कॉल सेंटर 'एनकेडी एसोसिएट्स' का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए 21 युवतियों समेत कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह शेयर बाजार में निवेश और अधिक मुनाफे का झांसा देकर लोगों से करीब 1.25 करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर चुका है। आरोपियों के कब्जे से 55 मोबाइल फोन, तीन कंप्यूटर, तीन फर्जी आधार कार्ड तथा एक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए गए हैं।
शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान डीसीपी क्राइम नीतू ने मामले का खुलासा किया। इसी दौरान गिरफ्तार युवतियों ने हंगामा करते हुए पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पुलिस ने सादे कागज पर हस्ताक्षर कराकर सुबह छोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन बिना जानकारी दिए मीडिया के सामने पेश कर दिया। युवतियों ने यह भी सवाल उठाया कि छापेमारी के दौरान पकड़े गए सभी लोगों को मीडिया के सामने क्यों नहीं लाया गया। युवतियों ने बताया कि वे 8 से 10 हजार रुपये मासिक वेतन पर कॉल सेंटर में कार्यरत थीं। कॉल करने के लिए मोबाइल नंबरों की सूची संचालकों की ओर से उपलब्ध कराई जाती थी। उनके खातों में केवल वेतन आता था और ठगी की रकम उनके खातों में नहीं आती थी। उनका दावा है कि उन्हें बताया गया था कि संस्था सेबी में पंजीकृत है। एचआर हेड अर्चना सिंह ने नियुक्ति कराई थी, लेकिन ऑफर लेटर कभी नहीं दिया गया। हंगामा शांत होने के बाद डीसीपी क्राइम ने दोबारा प्रेसवार्ता करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपी वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मऊ, मिर्जापुर तथा बिहार के रोहतास जिले के निवासी हैं।
एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार के अनुसार गिरोह पहले शेयर बाजार और निवेश में रुचि रखने वाले लोगों का डेटा जुटाता था। इसके बाद खुद को सेबी में पंजीकृत संस्था 'एनकेडी एसोसिएट्स' का प्रतिनिधि बताकर संपर्क करता और फर्जी दस्तावेजों के जरिए विश्वास जीतता था। निवेश पर भारी मुनाफे और सलाह देने के नाम पर सदस्यता एवं खाता प्रबंधन शुल्क क्यूआर कोड और यूपीआई आईडी के माध्यम से जमा कराया जाता था। इस संबंध में भेलूपुर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 453/2026 संबंधित धारा के तहत दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सरगना चंदौली के सकलडीहा निवासी अंबर सिंह मौर्य की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश में भी टीमें गठित की गई हैं। प्रारंभिक जांच में गिरोह के तार दिल्ली और गुरुग्राम से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है।
पुलिस के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटर पिछले तीन महीने से शाही टॉवर की दूसरी और तीसरी मंजिल पर संचालित हो रहा था। डीसीपी क्राइम नीतू ने युवतियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी फर्जी कंपनी में कार्य कर रहे थे और अधिकांश के पास वैध नियुक्ति पत्र भी नहीं था। वहीं, गिरफ्तार 21 युवतियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई।
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