Saturday, 30 May 2026

आजमगढ़ 3 ग्राम प्रधान नहीं बन सके प्रशासक 3 सदस्यीय समितियां बनने के बाद भी नहीं शुरू हुआ खातों का संचालन


 आजमगढ़ 3 ग्राम प्रधान नहीं बन सके प्रशासक


3 सदस्यीय समितियां बनने के बाद भी नहीं शुरू हुआ खातों का संचालन


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की तीन ग्राम पंचायतों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज होने के कारण संबंधित ग्राम प्रधान प्रशासक का कार्यभार नहीं संभाल सके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और कई महत्वपूर्ण योजनाएं पिछले कई महीनों से ठप पड़ी हैं। 


जानकारी के अनुसार रानी की सराय विकास खंड के मैनपारपुर, मिर्जापुर ब्लॉक के दमदियावन तथा सठियांव ब्लॉक के सोनपार ग्राम पंचायतों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच कराई गई थी। जांच के बाद संबंधित ग्राम प्रधानों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन किसी भी प्रधान ने निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई। बावजूद इसके कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर अंतिम चेतावनी जारी की गई, लेकिन तब भी प्रधानों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जिलाधिकारी के अनुमोदन पर विभाग ने शिकायतों को सही मानते हुए तीनों ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए। गांवों में विकास कार्यों को जारी रखने के उद्देश्य से तीन सदस्यीय समितियों का गठन किया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि समिति गठन के बाद विकास योजनाएं दोबारा गति पकड़ेंगी, लेकिन अब तक पंचायत खातों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग समेत अन्य विकास कार्य प्रभावित हैं। साथ ही ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। उधर, 26 मई 2026 को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत चुनाव न होने की स्थिति में शासन ने सभी ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की अनुमति प्रदान की थी। इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय से आवश्यक आदेश भी जारी किए गए, लेकिन जिन ग्राम प्रधानों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार पहले से सीज हैं, वे प्रशासक का दायित्व नहीं संभाल सके। परिणामस्वरूप संबंधित ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

आजमगढ़ महाराजगंज, पत्नी के हत्यारे को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा शादी के 6 महीने बाद ही पत्नी की हत्या कर घर में दफना दिया था शव 3 साल से जूझ रहा था गंभीर बीमारी से, पुलिसकर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार


 आजमगढ़ महाराजगंज, पत्नी के हत्यारे को नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा


शादी के 6 महीने बाद ही पत्नी की हत्या कर घर में दफना दिया था शव

3 साल से जूझ रहा था गंभीर बीमारी से, पुलिसकर्मियों ने कराया अंतिम संस्कार


उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद के महाराजगंज थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जहां पत्नी की हत्या के मुकदमे में जेल में बंद एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार में कोई सदस्य मौजूद न होने पर पुलिस कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए स्वयं उसका अंतिम संस्कार कराया। 


जानकारी के अनुसार महाराजगंज थाना क्षेत्र निवासी सूरज गौड़ (25) पुत्र गुलाब गौड़ की वर्ष 2023 में अनीता से शादी हुई थी। शादी के करीब छह माह बाद अनीता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप था कि उसकी हत्या कर शव को घर के कमरे में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर सूरज गौड़ तथा उसके परिजनों के खिलाफ दहेज हत्या और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने सूरज और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। 


बताया जा रहा है कि सूरज गौड़ पिछले लगभग तीन वर्षों से गंभीर टीबी (क्षय रोग) से पीड़ित था। बीमारी के चलते उसके फेफड़े बुरी तरह संक्रमित हो चुके थे। पहले उसका इलाज जेल अस्पताल में कराया गया, बाद में हालत बिगड़ने पर उसे वाराणसी में भी उपचार के लिए भेजा गया। पिछले करीब चार माह से वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। सूरज की मां का पहले ही निधन हो चुका था, जबकि उसके पिता अभी भी जेल में बंद हैं। परिवार में कोई भाई-बहन भी नहीं है। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन आगे नहीं आया। परिजनों के अभाव में पुलिस कर्मियों ने स्वयं अंतिम संस्कार की व्यवस्था कर युवक का दाह संस्कार कराया। पुलिस के इस मानवीय कदम की क्षेत्र में चर्चा हो रही है।