Saturday, 7 February 2026

आजमगढ़ फूलपुर सार्वजनिक कुएँ और तालाबों पर अतिक्रमण, हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ शनिचर बाजार का वर्षों पुराना कुआँ दबंगों के निशाने पर, प्रशासन पर उदासीनता का आरोप सोनकर समाज ने सौंपा प्रार्थना पत्र, एसडीएम ने दिया कार्रवाई का आश्वासन


 आजमगढ़ फूलपुर सार्वजनिक कुएँ और तालाबों पर अतिक्रमण, हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ


शनिचर बाजार का वर्षों पुराना कुआँ दबंगों के निशाने पर, प्रशासन पर उदासीनता का आरोप


सोनकर समाज ने सौंपा प्रार्थना पत्र, एसडीएम ने दिया कार्रवाई का आश्वासन


उत्तर प्रदेश आजमगढ़, वर्षों पूर्व उच्च न्यायालय द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर स्थित तालाब, पोखरा एवं कुओं को किसी भी दशा में बंद न किए जाने का सख्त आदेश पारित किया गया था, लेकिन राजस्व विभाग की उदासीनता के चलते आज तक उक्त आदेशों का समुचित अनुपालन नहीं हो सका है। तहसील क्षेत्र में स्थित अनेक सार्वजनिक तालाब, पोखरे और कुएँ धीरे-धीरे अस्तित्व से समाप्त किए जा रहे हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। मंदिर की भूमि पर बने पोखरे हों या पूर्वजों द्वारा निर्मित सार्वजनिक कुएँ, उन पर वंशजों द्वारा अवैध निर्माण कर उन्हें पाटने का सिलसिला लगातार जारी है। शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसी क्रम में नगर पंचायत फूलपुर के शनिचर बाजार में स्थित वर्षों पुराना सार्वजनिक कुआँ दबंगों के निशाने पर है। आरोप है कि एक परिवार द्वारा कुएँ की भूमि के साथ-साथ सार्वजनिक रास्ते पर भी अवैध कब्जा किया जा रहा है। 


इस मामले को लेकर सोनकर समाज के लोगों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कुएँ को पाटे जाने से रोकने के लिए 20 दिसंबर 2025 से 24 जनवरी 2026 तक तहसील समाधान दिवस, जनसुनवाई पोर्टल एवं उपजिलाधिकारी फूलपुर सहित अन्य अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने से आक्रोशित सोनकर समुदाय के लोगों ने सम्पूर्ण तहसील समाधान दिवस में पुन: प्रार्थना पत्र सौंपा। इस बार प्रार्थना पत्र के साथ माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति भी संलग्न की गई, जिसमें अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई तथा कुएँ एवं सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण से मुक्त कराए जाने की मांग की गई है। 


इस संबंध में उपजिलाधिकारी फूलपुर ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कराया जाएगा और सार्वजनिक रास्ते को किसी भी हाल में बंद नहीं होने दिया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितना खरा उतरता है और सार्वजनिक धरोहरों की रक्षा सुनिश्चित करता है या फिर ऐसे मामले फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं।

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